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26 February 2019

Blog Marathon - Post 25 - जिंदगी

ये जिंदगी भी
बडी नाझनीं है
कभी गम और कभी ख़ुशी
की आँख मिचोली है

लोग मिलते बिछडते हैं
यादे बनती बिगडती हैं
कभी फुल तो कभी काटे
राह पर पिरोती रहती हैं

डरना नही अँधेरो से
रुकना नही पथ के रोडो से
बस चलते रेहना ऐसे हीं
उजालो की खोज मैं

इन्सान वही जो 
गिरकर संभले
ठेस लगे भी तो
गिरके फिर से ऊठ जाए

जिंदगी बहुत कुछ सिखाती हैं
जीने का होसला देकर
आसू पोचकर, उमीद बांधकर
आगे बढ़ने की हिंमत जुटाती हैं


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25 February 2019

Blog Marathon - Post 24 - धरती और आकाश

कितने दूर कितने पास
ये धरती और वो आकाश
दूर होके भी
हैं ये हमेशा साथ साथ

मिलते हैं थोडी देर सही
उस क्षितिज के पार
कुछ पलों के लिए
ही बस हाथों मैं हाथ

कुछ देर बाद फिर हो जाते हैं जुदा
और ढूँढ़ते रहते हैं
एक दूसरे से मिलने की
बस एक वजह

 

18 February 2019

Blog Marathon - Post 18 - रूबरू

तेरा ज़िक्र हो या न हो
बस वो तुझे याद करने का बहाना ढूढ़ना
तेरे चेहरे पर वो मुस्कान का खिलना
तुम्हारा ऐसे ही अचानक रूबरू आना

सूरज की पहेली किरन जैसी तुम्हारी भोली सूरत
बालों का वो हवा के साथ खेलते रहना
तुम्हारी आँखें और उफ़ वो पलकों का उठना
और मुझे देखखर गिरना और आहिस्ता से निकल जाना

तुम सपना हो या हकीकत
सोचता हूँ अक्सर
तुम्हें पाने की है चाहत
कब होगी मंजूर मेरी दुआ

15 February 2019

Blog Marathon - Post 12 - यहाँ मैं अजनबी हून

मुझे कोई पेहचानता नही
ना कोई पुच्छता है ये सवाल
कैसे हो भाई
क्यूँ हो इतने बेहाल

फुल मेहेकते हैं इधर भी
पर मेरे देस जैसी खुशबू नही
पंछी उडते हैं इधर भी
पर उनका आस्मान मेरे जैसा नही

सब कुछ होते हुए भी यहाँ
लगता है बिलकुल खाली
आस पास ना दोस्त, ना भाई
रास्ते एकदम खाली खाली

गलियां खाली, घर खाली
कमरे खाली, इन्सान खाली,
दिल परेशान और हैरान

गिनते हुए दिन
कब होगी घर वापसी
कब होगी घर वापसी


08 February 2019

Blog Marathon - Post 6 - ऍ दिल है मुश्किल

कुछ ऐसा रिश्ता है ए दिल तुझसे 
जो समझाये नही समझता 
मैने आगर कही दूर जाना चाहा
तू है की बस लोगो में ही उलझा रहता

क्यूँ तुझे अकेले रेहने की आदत नही पडती 
क्यूँ तू औरों की फिक्र में डुबा रहता है 
क्यूँ तू औरों के दर्द सवारने में लगा रहता है 
जब खुद्द से खुद्द ही की नही संभलती 

खुद्द के लिये कुछ देर जी 
खुद्द से कर थोडी दोस्ती 
खुद्द ही बन खुद्द का हमसफर
लिख एक दास्तान नई

Use it or lose it

Today, on the 9th of June is my paternal grandfather's death anniversary. Even after so many years of him not being around, I still reme...